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हर ब्लॉक से दो सरकारी स्कूल को मिलेगा पीएम श्री का दर्जा

हर ब्लॉक से दो सरकारी स्कूल को मिलेगा पीएम श्री का दर्जा

 

– चयनित स्कूलों के छात्रों को मिलेगा बिना बैग से स्कूल में आकर पढ़ाई का मौका

 

शिक्षा फोकस, दिल्ली। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, महाराष्ट्र, असम, गुजरात, कर्नाटक समेत 17 राज्यों ने पीएम श्री स्कूल ( पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया) योजना में शामिल होने को लिखित हामी भर दी है। केंद्र सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 से हर ब्लॉक से दो सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल का दर्जा देने की चयन प्रक्रिया के लिए छह बिंदूओं का 153 अंकों का मापदंड तैयार किया है।

फिलहाल करीब 2.72 लाख स्कूल इन मापदंडों के तहत चिह्नित किए गए हैं। दूर-दराज, ग्रामीण, पिछड़े इलाकों के स्कूली छात्रों को भी महानगरों के बड़े निजी स्कूलों की तर्ज पर इन पीएम श्री स्कूलों में सुविधाएं मिलेंगी।

खास बात यह है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पर आधारित अनिवार्य पाठ्यक्रम, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, अच्छे ट्रेनिंग प्राप्त शिक्षक, लर्निंग आउटक्रम, वोकेशनल ट्रेनिंग, इंटर्नशिप की सुविधा मिलेगी। इन स्कूलों के छात्रों को विशेष तय दिनों में बिना बैग से स्कूल में आकर पढ़ाई का मौका भी मिलेगा।

शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पीएम श्री स्कूल योजना के लिए सभी राज्यों को पत्र लिखा था। इसके बाद मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, दादरा नगर, यूपी, समेत 17 राज्यों ने लिखित हामी भर दी है। जबकि अन्य राज्य शामिल होने की प्रक्रिया में हैं। हिमाचल में चुनाव आचार संहिता के कारण लिखित समझौता नहीं हो पाया है।

इसमें राज्यों ने अनिवार्य लिखित सहमति दी है कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तैयार पाठ्यक्रम और उसकी सिफारिशों के तहत पढ़ाई करवाएंगे। कुल 27,360 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें बाल वाटिका से लेकर 12वीं कक्षा तक के स्कूल शामिल होंगे। पोर्टल साल में चार बार तीन-तीन महीने के अंतराल पर खुलेगा। कोई भी मापदंड पूरा करने वाला स्कूल आवेदन कर सकता है।

छह सख्त मापदंड के बाद पीएम श्री का टैग
सबसे पहले स्कूल को आवेदन करने के लिए 10 बिंदूओं का मापदंड पूरा करना होगा। इसमें पक्का भवन, लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय, सुरक्षा मानक, शिक्षिकों की पूरी ट्रेनिंग, दिव्यांग जन छात्रों के लिए रैंप, खेलकूद, साफ पीने का पानी आदि होना जरूरी है।

इन मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद मंत्रालय द्वारा तैयार छह अन्य मापदंड के आधार पर चयन होगा, जिसमें पाठ्यक्रम, पढ़ाने का तरीका, टीचर ट्रेनिंग, लड़के-लड़कियों की संख्या, लड़कियों को शिक्षा से जोड़ने पर महत्वपूर्ण काम, छात्र व अभिभावक संतुष्ठ हैं या नहीं, मिड-डे मील, टीचर व प्रिंसिपल काम करते हैं या नहीं आदि है। इन छह मापदंडों को स्कूलों एक प्रश्न पत्र के फारमेट में भरके देंगे। कुल 153 अंकों में से उनकी परफारमेंस के आधार पर अंक मिलेंगे। जिला प्रशासन जानकारी को औचक निरीक्षण के बाद रिपोर्ट तैयार करेंगे। राज्य इस रिपोर्ट को केंद्र को भेजेंगे।

दिसंबर तक पहले चरण में मॉडल का दर्जा

देशभर से करीब 2.72 लाख स्कूलों को चयनित किया है, जोकि दोनों प्रकार के मापदंड को पूरा करते हैं। आवेदन करने के लिए पोर्टल तैयार हो गया है। चयनित स्कूलों के प्रिंसिपल और राज्यो को मैसेज के माध्यम से सूचना मिलेगी। हर चयनित स्कूल को अपने नाम के साथ पीएम श्री स्कूल का टैग लगाना अनिवार्य होगा। इसके बाद स्कूलों को इंफ्रास्ट्रक्चर, लैब आदि के लिए फंडिग होगी। इसमें नॉर्थ-ईस्ट व पहाड़ी राज्यों को 90 फीसदी पैसा केंद्र और 10 फीसदी राज्य सरकार देगी। जबकि अन्य को 60 केंद्र और 40 फीसदी राज्य पैसा देंगे। एक अनुमान के मुताबिक, अलग-अलग वर्ग के तहत प्रति स्कूल 45 लाख से लेकर 60 लाख रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर समेत सुविधाएं बढ़ाने को मिलेंगे।

आईआईटी की तर्ज पर दूसरों के रोल मॉडल

आईआईटी की तर्ज पर पीएम श्री स्कूल अपने इलाकों के अन्य सरकारी स्कूलों के रोल मॉडल होंगे। इनके छात्र हैकाथॉन, सर्वे, साइंस व मैथ्स प्रोजेक्ट आदि में शामिल होंगे। भाषा समेत वोकेशनल ट्रेनिंग के माध्यम से उन्हें रोजगार से जुड़ने का मौका दिया जाएगा। गुणवत्ता युक्त शिक्षा पर यहां खास तौर ध्यान दिया जाएगा।

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