Latest news

उम्मीदों की सरकार फेर रही है एडिड स्कूल कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी – मनीष अग्रवाल

उम्मीदों की सरकार फेर रही है एडिड स्कूल कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी – मनीष अग्रवाल

 

 

– रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन केसों क्लियर करने में हो रही है देरी

 

 

शिक्षा फोकस, चंडीगढ़। पंजाब की आप सरकार जिससे सभी वर्गों को बहुत अपेक्षा थी कि उनके आने के बाद हमारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। परन्तु आप सरकार के 8 महीने बीत जाने के बाद भी एडिड स्कूल कर्मचारियों की समस्याओं का हल होता हुआ नज़र नहीं आ रहा। एडिड स्कूल कर्मचारियों को 6वें वित्त कमीशन के लाभ से वंचित रखा गया है। एडिड स्कूल कर्मचारियों का महंगाई भत्ता पिछले 3.5 वर्षों से नहीं बढ़ा है जबकि महंगाई लगभग 10% प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रही। जो महंगाई भत्ता 225% होना चाहिए, एडिड कर्मचारियों को 148% पर गुजारा करना पड़ रहा है। यह सभी आरोप एडिड स्कूल इम्प्लाइज एसोसिएशन, पंजाब के प्रेस सचिव मनीष अग्रवाल ने लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले काफी समय से एडिड कर्मचारियों के रिटायर होने पर उनके पेंशन केस स्वीकार कर पीपीओ नम्बर जारी करने में भी अनचाही देरी की जारी है। 30 साल सेवाओं में रहने के बाद भी कई कई महीनों से रिटायर्ड कर्मचारी पेंशन और बाकी लाभों से वंचित है। पंजाब सरकार आर्थिक मजबूती के दावा कर रही है परंतु उनकी सरकार में एडिड कर्मचारी आर्थिक तंगहाली काट रहे है। कर्मचारियों को घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है।

काबिले गौर है कि कि पंजाब के एडिड स्कूल कर्मचारियों को सरकारी स्कूलों के बराबर वेतन और भत्ते का अधिकार है। अभी तक हर वेतन आयोग की सिफारिशों को एडिड कर्मचारियों पर लागू किया जाता रहा है, पिछली कांग्रेस सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को 6वें पे कमीशन की सिफारिशें लागू कर दी परन्तु एडिड स्कूल कर्मचारियों को इससे बंचित रखा। जब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह से एडिड स्कूलों का वफद मिला तो उन्होने इन कर्मचारियों को भी 6वें पे स्केल देने का ऐलान किया व वकायदा समाचार पत्रों में इसका प्रचार करके सियासी लाभ लेने की कोशिश की,परंतु उनका ऐलान भी समाचार पत्रों तक सीमित रहा व आचार संहिता के चलते अधिकारिक तौर पर कोई कारवाई नही हो सकी।

मार्च में पंजाब में सरकार बदलने के बाद नए मंत्रियों और विधायकों से लगातार सम्पर्क किया जा रहा है परन्तु आश्वाशन के सिवाएँ कुछ मिलता नज़र नहीं आ रहा। अपितु फ़ाइल एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर काटती ही नज़र आ रही है। जिस काम को एक सामान्य नोटिफिकेशन से किया जा सकता है, उसके लिए गैर जरूरी कागजो में एडिड कर्मचारियों को उलझा कर रखा हुआ है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए एडिड स्कूल इम्प्लाइज एसोसिएशन के प्रेस सचिव मनीष अग्रवाल ने बताया कि पंजाब के एडिड कर्मचारियों को 1967 से ही सरकारी कर्मचारियों के बराबर वेतन और भत्ते मिलते रहे है। 1996, 2006, 2011 में भी वित्त आयोग और उसके बाद की सिफारिशों को एडिड कर्मचारियों पर लागू किया गया था। परन्तु पिछले कुछ समय से सरकार ने एडिड स्कूलों के साथ सरकार ने सौतेला व्यवहार करना शुरू कर दिया है।

कई बार अपना हक़ प्राप्त करने के लिए माननीय न्यायलय का सहारा भी लेने पड़ता है, जिसमे काफी पैसा और समय बर्बाद हो जाता है। पंजाब के सभी एडिड स्कूल कर्मचारियों को इस सरकार से काफी उम्मीद थी कि यह एडिड कर्मचारियों की समस्याओं को हल पहल के आधार पर करेगी परन्तु अभी तक सिर्फ आश्वाशन ही मिल रहे है। इसलिए एडिड स्कूलों के समूह कर्मचारी यह मांग करते है कि पंजाब के मुख्यमंत्री स्वयं इस बात का संज्ञान लेते हुए शिक्षा मंत्री और वित्त मंत्री को निर्देश दे कि एडिड स्कूल कर्मचारियों की समस्याओं का पहल के आधार पर हल करे।

पिछली सरकार की भेदभाव वाली नीति के कारण ही एडिड कर्मचारी अंतरिम राहत मकान किराया भत्ता, मेडिकल भत्ता, टेलीफोन भत्ता आदि जैसे लाभों से वंचित रहे।सरकार से मांग है कि एडिड कर्मचारियों से भेदभाव पूर्ण निति को त्याग कर सरकारी कर्मचारियों के बराबर बनता हक देकर उनके साथ इंसाफ करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: