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बोर्ड ने डिजिलॉकर में रखे सर्टिफिकेट को लेकर यूजीसी से कही यह बात

बोर्ड ने डिजिलॉकर में रखे सर्टिफिकेट को लेकर यूजीसी से कही यह बात

 

 

 

– कहा, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को दिये जाएं यह निर्देश

 

 

शिक्षा फोकस, दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कहा है कि डिजिलॉकर पर अपलोड मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट कानूनी रूप से मान्य है। बोर्ड ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) सचिव से अपील की है कि सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी स्वीकार करने के निर्देश दें।

क्या है मामला?

दरअसल, सीबीएसई ने 12वीं का परिणाम जुलाई में जारी किया था। इसके बाद बोर्ड ने मार्कशीट कम पासिंग सर्टिफिकेट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट को डिजिलॉकर के जरिए उपलब्ध करा दिया था। अब विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थान दाखिले में इन्हें स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि छात्र को प्रिटेंड कॉपी जमा करनी होगी।

परीक्षा नियंत्रक ने कही यह बात

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने बताया कि डिजिटल दस्तावेज डिजिलॉकर में उपलब्ध कराए गए हैं। यह देखने में आया है कि कुछ विश्वविद्यालय छात्रों को माइग्रेशन सर्टिफिकेट की प्रिटेंड कॉपी जमा करने के लिए कह रहे हैं।

सीबीएसई जल्द ही छात्रों को प्रिंटेड कॉपी मुहैया कराएगा। इससे पहले हम यह साफ करना चाहते हैं कि डिजिलॉकर पर मार्कशीट कम पासिंग सर्टिफिकेट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट उपलब्ध हैं। यह डिजिटल हस्ताक्षर वाले दस्तावेज भी अन्य प्रिटेंड दस्तावेजों की तरह कानूनी रूप से मान्य हैं। लिहाजा सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को इसे स्वीकार करना चाहिए।

UGC से किया अनुरोध

डॉ. भारद्वाज ने यूजीसी सचिव से भी अनुरोध किया है कि सभी उच्च संस्थानों को सीबीएसई द्वारा छात्रों के डिजीलॉकर में उपलब्ध कराए गए क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर वाली डिजिटल कॉपी स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए। सीबीएसई की ओर से मार्कशीट की कॉपी डिजिटल रूप में देने की शुरूआत 2016 से की गई थी।

क्या है डिजिलॉकर?

डिजिलॉकर एक भारतीय डिजिटलीकरण ऑनलाइन सेवा है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा केंद्र की डिजिटल इंडिया पहल के तहत प्रदान की जाती है।

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