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सेवामुक्त अध्यापक होंगे स्कूलों में बतौर मेंटॉर नियुक्त

सेवामुक्त अध्यापक होंगे स्कूलों में बतौर मेंटॉर नियुक्त

 

 

– स्कूलों में शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए सरकार लेने जा रही रिटायर्ड शिक्षकों की मदद

 

 

शिक्षा फोकस, पटना। शिक्षा विभाग से सेवामुक्त हुए अध्यापकों को फौज की तरह पुनः नौकरी मिलेगी। यूपी सरकार ने फैसला किया है कि शिक्षा विभाग से सेवामुक्त हो चुके शिक्षकों को स्कूलों के मेंटॉर नियुक्त किया जाए। फैसले के मुताबिक प्राथमिक और बेसिक स्कूलों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए अब सेवानिवृत्त यानी रिटायर्ड शिक्षकों की मदद ली जा रही है।

राज्य सरकार 70 वर्ष तक के शिक्षकों का उनकी सहमति के आधार पर इस जिम्मेदारी के लिए चुनेंगे। रिटायर्ड शिक्षकों की नियुक्ति ‘शिक्षक साथी’ के रूप में जिला स्तर पर गठित समिति करेगी। ये शिक्षक मेंटॉर (mentor) की भूमिका निभाएंगे और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए काम करेंगे।

एक शिक्षक आजीवन शिक्षक रहता है, भले ही उसको नौकरी से अवकाश प्राप्त हो जाए। सेवानिवृत्त शिक्षकों को अब यूपी के प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में मेंटॉर के रूप में काम करने का मौका मिल रहा है। शिक्षा विभाग उनकी पुनर्नियुक्ति ‘शिक्षक साथी’ के रूप में करेगा।

इस बात के लिए बेसिक एजुकेशन प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने आदेश जारी कर दिए हैं। जारी आदेश में विस्तार से ऐसे शिक्षकों की जिम्मेदारी और नियुक्ति की शर्तों को बताया गया है। ये आदेश बेसिक शिक्षा परिषदीय स्कूलों के साथ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) पर भी लागू होगा।

70 वर्ष की आयु तक के शिक्षक बन सकेंगे मेंटॉर

‘शिक्षक साथी’ के रूप में इच्छुक रिटायर्ड शिक्षकों की नियुक्ति होगी। इनका कार्यकाल 1 वर्ष का होगा हालांकि, एक साल बाद इस कॉन्ट्रैक्ट को बढ़ाया जा सकेगा। शिक्षकों के परफॉरमेंस के आधार पर कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू होगा। शिक्षक साथी की नियुक्ति की अधिकतम आयु 70 वर्ष होगी।

राज्य और राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को चयन में वरीयता दी जाएगी। इस नियुक्ति के लिए शिक्षक का परिषद के विद्यालयों में अपने सेवाकाल में सहायक टीचर या प्रिन्सिपल के रूप में 5 साल का अनुभव होना भी जरूरी है।

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