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प्रदर्शन में शामिल होने वाले 50 से अधिक शिक्षक स्सपेंड

प्रदर्शन में शामिल होने वाले 50 से अधिक शिक्षक स्सपेंड

 

 

– सभी शिक्षक अपनी पुरानी पेंशन बहाली आदि मांगों को लेकर हुए संघर्ष में शामिल होने पर हुई कार्रवाई

शिक्षा फोकस, भोपाल। भोपाल में करीब 7 साल बाद 13 सितंबर को हुए शिक्षकों के आंदोलन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाई है। प्रदर्शन में आए शिक्षकों के अलावा कई शिक्षक 13 सितंबर को स्कूलों से गायब थे। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर के करीब 400 शिक्षकों को नोटिस भेजकर पूछा था कि क्या वे भोपाल में हुए प्रदर्शन में शामिल थे? नोटिस मिलने के बाद भी शिक्षकों ने कोई जवाब नहीं दिया। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग ने बीते चौबीस घंटे के दौरान करीब 50 से ज्यादा शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया।

शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि शासन द्वारा लोकतांत्रिक मांगों पर यह कार्यवाही करना ठीक नहीं है। मध्यप्रदेश के सभी शिक्षक अपनी पुरानी पेंशन बहाली, नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता आदि मांगों को लेकर संघर्षरत हैं। सरकार अहंकार से ग्रसित होकर निलंबित करने का कार्य कर रही है। यह शिक्षकों की आवाज को दबाने का कृत्य है।

उन्होंने कहा कि सरकार इस भ्रम से मुक्त रहे कि सरकार के इन निर्णयों पर शिक्षक अपनी जायज मांगों से पीछे हटेंगे अथवा संघर्ष को विराम देंगे। बल्कि इन आदेशों के विपरीत शिक्षक पूरे प्रदेश मै और अधिक लामबंद होंगे एवं अपनी मांगों को और अधिक मुखरता के साथ रखेंगे। शिक्षक नेतृत्वकर्ता एवं आंदोलन रत शिक्षकों को निलंबित किए जाने की शासकीय शिक्षक संगठन तीखी निंदा करता है। सरकार से अपेक्षा की है कि आंदोलन को कुचलने एवं दबाने की बजाय एक सार्थक संवाद कर समस्या एवं शिक्षकों की मांगों के निराकरण की दिशा में प्रयास करें।

भोपाल की सीमा पर रोका था

शासन ने संगठन को भोपाल में किसी भी तरह के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। करीब 7 साल पहले साल 2015 में संगठन ने भोपाल में प्रदर्शन किया था। इसमें बड़ी संख्या में शिक्षक लालघाटी तक पहुंच गए थे, जिससे ट्रैफिक जाम के हालात बने थे। प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस के साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भोपाल की सीमा पर तैनात किया गया है, ताकि कोई भी शिक्षक किसी तरह से शहर के अंदर न सके। सूत्रों की माने तो इस प्रदर्शन में भोपाल से कोई भी शिक्षक शामिल नहीं हुए थे। प्रदर्शन के लिए भोपाल के अलावा महाकौशल, बुंदेलखंड, मालवा, निमाड़, ग्वालियर और बघेलखंड से शिक्षकों के भोपाल पहुंचे थे। इसमें अध्यापक संध के अध्यक्ष भरत पटेल नजर नहीं आए थे। उसके बाद भी उन्हें सस्पेंड किया गया है।

तिरंगा लेकर रैली निकाली

संगठन ने भोपाल के यादगारे शाहजहानी पार्क, भेल दशहरा मैदान और जंबूरी मैदान में धरने की अनुमति मांगी थी, लेकिन शासन ने अब तक अनुमति नहीं दी है। सूखीसेवनिया के पास चौपड़ाकलां स्थित श्रीराम जानकी मंदिर से तिरंगा लेकर रैली निकाली थी। शिक्षकों को वहीं पर रोक दिया था। प्रदर्शन के दौरान बारिश होने से शिक्षक यहां-वहां हो गए थे। इससे कोई भी भोपाल शहर के अंदर नहीं पहुंच पाया था।

यह हैं मांगें

– सामान्य प्रशासन विभाग, वित्त विभाग, जनजातीय कार्य विभाग व स्कूल शिक्षा विभाग के बीच तालमेल नहीं होने के कारण पिछले 4 साल से क्रमोन्नति यानी समयमान वेतनमान नहीं मिल पा रहा है।
– पुरानी पेंशन बहाली नहीं मिलने से शिक्षकों के परिवारों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें रिटायरमेंट के बाद 700 से 2000 तक पेंशन मिल पा रही है।
– अनुकंपा के लंबित मामले नहीं निपटने से मृत शिक्षकों के परिवार वाले परेशान हैं।
– अतिथि शिक्षक कैडर खत्म कर इन्हें नए कैडर में शामिल किया जाए।

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