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पंजाब में 10 साल दौरान 14 फीसद कॉलेज बढ़े, पर दाखिलों में आई 28 फीसद गिरावट

पंजाब में 10 साल दौरान 14 फीसद कॉलेज बढ़े, पर दाखिलों में आई 28 फीसद गिरावट

 

 

– कैग ने हायर एजुकेशन विभाग की परफॉर्मेंस रिपोर्ट की जारी

 

 

शिक्षा फोकस, चंडीगढ़। पंजाब में हायर एजुकेशन विभाग की परफारमेंस की ताजा आडिट रिपोर्ट में कंप्ट्रोलर एंड ऑडिट जनरल (कैग) ऑफ इंडिया ने अहम खुलासे किए हैं। पंजाब में 2010-11 में 973 काॅलेज थे जो कि 2019-20 में 1111 हो गए। इस तरह प्रति 1 लाख जनसंख्या पर 29 से 35 काॅलेज हैं।

काॅलेजों की संख्या में 14.18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। काॅलेजों की डेंसिटी 20.69% बढ़ी लेकिन हकीकत ये भी है कि काॅलेजों में दाखिले 2010-11 से 2019-20 तक 28% घट गए हैं। पंजाब में काॅलेजों में 3 को ही नैक की रैंकिंग मिली।

कैग ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिशें की हैं, जिनका पालन करके पंजाब सरकार हायर एजूकेशन में सुधार ला सकती है। हकीकत ये भी है कि 33 सब डिवीजनों में से केवल 17 में सरकारी काॅलेज हैं। जबकि 10 सब डिवीजनों में एक भी काॅलेज नहीं है। कैग ने दाखिलों में बढ़ोतरी व डियोग्राफिमल मैपिंग करके नए काॅलेज खोलने की सिफारिशें की हैं।

कैग ने मार्च 2021 से अगस्त 2021 तक पंजाब में 38 काॅलेजों का आडिट किया। इस आडिट में पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला, जीएनडीयी अमृतसर, राजीव गांधी यूनिर्सिटी शामिल रही है।

 

 

कैग ने पाया

2015 से 2020 तक स्टेट मैरिट स्कालरशिप स्कीम में 632 स्टूडेंट्स को लाभ दिया गया। इस पर 7 लाख खर्च हुए।
उक्त अवधि में पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप स्कीम में 3,36,624 स्टूडेंट्स को लाभ दिया गया। जिस पर 702 करोड़ रुपए खर्च हुए।
सिफारिश

-एक डिवीजन में न्यूनतम 1 काॅलेज खोला जाए।
-स्टूडेंट्स का दाखिला बढ़ाने के लिए प्लान बनाएं। यूनिवर्सिटीज में होस्टल की कैपेसिटी जरूरत के अनुसार अपग्रेड की जाए।
-नैक के बैंचमार्क के अनुसार सिलेबस बने।
-अभी 49 स्टूडेंट्स के लिए 1 टीचर उपलब्ध है। जबकि 20 स्टूडेंट्स पर 1 टीचर होना चाहिए।
-स्टेट लेवल क्वालिटी एश्योरेंस सैल बने। जो कि नैक की रैंकिंग से काॅलेजों को जोड़े।
-टीचरों के पद 27 फीसदी से लेकर 54 फीसदी तक खाली पड़े हैं। इन्हें भरा जाए।
-7 सब डिवीजनों में कॉलेज ही नहीं

कैग ने पाया कि 7 सब डिवीजन ऐसे थे जहां काॅलेज उपलब्ध नहीं है। वजह ये है कि पंजाब में जियोग्राफीकल मैपिंग करके तय नहीं हुआ कि कहां-कहां पर काॅलेज खोलना है। सिर्फ सरकारी 3 काॅलेज नैक की रैंकिंग में हैं।

इसकी कमी की वजह है साफ्ट स्किल की कमी, टीचरों की कमी, प्री प्लेस में ट्रेनिंग नहीं होती, इंडस्ट्री के साथ सरकारी काॅलेजों का लिंक कमजोर। काॅलेजों में मैनेजमेंट इनफारमेशन सिस्टम की कमी है। काॅलेजों की माॅनिटरिंग और इवैल्यूएशन का सिस्टम नहीं है। जिससे शिक्षा में बराबरी, गुणवत्ता तथा प्रशासन प्रबंधन में कमियां हैं।

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