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यूके बच्चों के लिए मुसीबत तो ट्रेवल एजेंट के लिए वरदान

यूके बच्चों के लिए मुसीबत तो ट्रेवल एजेंट के लिए वरदान

 

 

 

– शिक्षा के लिए यूके जाने वाले बच्चों को वहां नहीं मिल रहा 20 घंटे काम

 

 

 

शिक्षा फोकस, लंदन। जमा दो के बाद विदेश में पढ़ाई करने का विद्यार्थियों का सपना ट्रेवल एजेंट के लिए वरदान बन रहा है। कनाडा, अस्ट्रेलिया, न्यूजीलेंड, यूरोप तथा अमेरिका में बच्चों को वीजा मिलना मुश्किल हो चुका है तो ऐसे में प्रत्येक ट्रेवल एजेंट के मुंह पर यूके का नाम है। रोजाना पंजाब से हजारों विद्यार्थी यूके में अपना भविष्य संवारने के लिए कूच कर रहे हैं। यह कहा जा सकता है कि ट्रेवल एजेंट यूके के नाम पर चांदी कूट रहे हैं तो विद्यार्थी फस रहे हैं। मौजूदा हालात ऐसे हैं कि बच्चों को यूके में 20 घंटे का काम नहीं मिल रहा है, जिससे बच्चे परेशान हैं। ऐसी परेशानी झेल रहा एक स्टूडेंट गत दिवस मौत के मुंह में चला गया है।

हरप्रीत सिंह वह स्टूडेंट था जो अपने व अपने परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए यूके के वॉल्वरहैम्प्टन पहुंचा था। स्टूडेंट्स की मानें तो उसे वहां काम करने लिए को स्थान नहीं मिल रहा था, जिससे वह काफी परेशान था। इसी परेशानी में गत दिवस वह इस दुनिया का छोड़ गया। उस छात्र की मृतक देह को इंडिया पहुंचाने के लिए छात्र फंड एकत्रित कर रहे हैं।

स्टूडेंट्स के मुताबिक करीब एक साल पहले यूके के लंदन में हालात कुछ ठीक थे। भारत से आने वाले बच्चों को पढ़ाई के साथ जो 20 घंटे काम करने का मौका मिलता था, वह पूरा हो रहा था। मगर, इस समय हालात ऐसे हैं कि यूके की धड़कन लंदन में भी स्टूडेंट्स काम के लिए दर-दर भटक रहे हैं। वहां उन्हें अपना खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है। पार्ट टाईम काम न मिलने के कारण बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं।

हालांकि ट्रेवल एजेंटों की मानें तो यूके में बच्चों को जहां काम आसानी से मिल जाता है वहीं पीआर के लिए भी उन्हें परेशानी नहीं उठानी पड़ती। मगर, ट्रेवल एजेंटों को यह दोनों दावे झूठे हैं। बच्चों को इस समय यूके में 20 घंटे काम ही नहीं मिल रहे हैं, जिस कारण वह इनलीगल होकर काम करने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में जो स्टूडेंट्स को इनलीगल हो कर काम करते हैं, कई बार उन्हें उनकी मजदूरी के पैसे भी नहीं मिलते क्योंकि वह इसकी शिकायत पुलिस को भी कर सकते।

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