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ब्रेकिंग न्यूज़ः वोटर कार्ड नहीं तो कालेजों में दाखिला भी नहीं

ब्रेकिंग न्यूज़ः वोटर कार्ड नहीं तो कालेजों में दाखिला भी नहीं

 

 

 

– स्टूडेंट्स चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के लिए कॉलेजों में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब बनाने के हुकम

 

 

 

शिक्षा फोकर, दिल्ली। शैक्षणिक सत्र 2023-24 से यूनिवर्सिटी एडमिशन में कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण बदलावों का ऐलान भी कर दिया है। इनमें से एक है वोटर कार्ड का अनिवार्य होना। अगर आपकी उम्र 18 साल या इससे ज्यादा हो चुकी है, तो आपके पास वोटर आई-कार्ड होना जरूरी है, इसके बिना आप महाराष्ट्र के कॉलेजों में एडमिशन नहीं ले पाएंगे। युवाओं में मतदान यानी वोटिंग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ये फैसला लिया है।

महाराष्ट्र उच्च एवं तकनीकि शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले की घोषणा की। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने महाराष्ट्र के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर की बैठक बुलाई थी। इसमें महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे। इसी बैठक में इन नए नियमों का ऐलान किया गया।

इसके अलावा महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव आयुक्त श्रीकांत देशपांडे ने भी सभी महाराष्ट्र की यूनिवर्सिटी से अपील की कि वे कॉलेजों में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब बनाएं ताकि स्टूडेंट्स चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें। गौरतलब है कि फिलहाल राज्य में 90 फीसदी यूनिवर्सिटी और कॉलेज स्टूडेंट्स वोटर रजिस्ट्रेशन लिस्ट से बाहर हैं।

 

 

 

तीन साल का ग्रेजुएशन कोर्स खत्म!

युवाओं को चुनाव से जोड़ने और वोट देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए वोटर आईडी अनिवार्य करने के अलावा महाराष्ट्र सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है वो है 3 साल का ग्रेजुएशन खत्म करने का। महाराष्ट्र सरकार ने ऐलान किया है कि अगले एकेडेमिक ईयर से डिग्री कोर्स चार साल के होंगे। केंद्र सरकार की नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी 2020) के तहत इसे लागू किया जा रहा है।

यूनिवर्सिटी और कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करने में आने वाली परेशानियों के समाधान के लिए सरकार पूर्व VCs की कमेटी बनाने वाली है।

केंद्र सरकार द्वारा 2020 में लाई गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 4 साल ग्रेजुएशन डिग्री कोर्स का प्रावधान किया गया है। इसमें हर साल में स्टूडेंट्स को एग्जिट ऑप्शन देने का भी नियम है। एक साल पूरा करने पर सर्टिफिकेट, दूसरे साल पर डिप्लोमा, इसी तरह चार साल पूरे करने पर डिग्री दी जाएगी। स्टूडेंट्स कभी भी कोर्स छोड़ सकते हैं और कभी भी वापस ज्वाइन कर सकते हैं। महाराष्ट्र सरकार जल्द इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन तैयार करेगी।

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