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अध्यापक को पढ़ाई के साथ किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए भी देनी होगी ड्यूटी!

अध्यापक को पढ़ाई के साथ किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए भी देनी होगी ड्यूटी!

 

– कभी शिक्षा संबंधी निर्देशों के लिए प्रयोग में आने वाले एजुसेट पर शिक्षा विभाग ने दिए कई निर्देश

 

शिक्षा फोकस, जालंधर। सरकार की तरफ से शिक्षा के अतिरिक्त शिक्षकों से लिए जा रहे दूसरे कार्यों का विरोध करने वाले अध्यापकों को अब एक नई ड्यूटी देने के लिए भी त्यार रहना होगा। इस ड्यूटी की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। सरकार ने भी पहलकदमी करते हुए शिक्षा विभाग के एजुसेट के माध्यम से गत दिवस एक बैठक कर शिक्षकों को पराली जलाने से वातावरण और स्वास्थ्य पर पडऩे वाले कुप्रभावों संबंधी जागरूक करने के लिए एक लैक्चर लगाया गया। इससे साफ है कि आगामी दिनों को दौरान अध्यापकों को स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई, स्कूल के अन्य कार्यों के साथ-साथ खेतों के चक्कर भी लगाने होंगे और देखना होगा कि कोई किसान पराली को आग न लगाए।

गौर हो कि गत दिवस पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने खेतों में पराली जलाने के कुप्रभावों संबंधी ऐजूसैट पर एक विशेष लैक्चर करवाया गया। इस लैक्चर में शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का हवाला देते हुए विद्यार्थियों पर पराली जलाने से होने वाले प्रभाव संबंधी जानकारी दी।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् द्वारा आयोजित इस विशेष लैक्चर दौरान डॉ. मनिन्दर सिंह सरकारिया डायरैक्टर राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् और जसविन्दर सिंह लैक्चरार फिजिक्स ने ऐजूसैट के द्वारा प्रभावशाली ढंग से स्कूल प्रमुखों, अध्यापकों और विद्यार्थियों को जागरूक किया और दूसरों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. सरकारिया ने संबोधित करते हुए कहा कि साफ़-सुथरा पर्यावरण बनाए रखने के लिए विद्यार्थी और अध्यापक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। इस मौके पर डॉ. जसविन्दर सिंह लैक्चरार फिजिक्स जि़ला पटियाला ने समूह अध्यापकों को संबोधित किया और उन्होंने ढंग और क्रियाओं संबंधी चर्चा की, जिससे आम लोगों को बिना खर्च किए पराली जलाने के नुकसानों से अवगत करवाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। साँस की बीमारी वाले लोगों की जान जाने का ख़तरा बढ़ जाता है। ज़मीन में रह रहे छोटे जीव-जंतू मारे जाते हैं, जोकि प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में भूमि को उपजाऊ बनाने में सहायक होते हैं। इस मौके पर उन्होंने पराली के सही प्रयोग सम्बन्धी अपने सुझाव भी साझे किये। इस मौके पर प्रोग्राम कोऑर्डीनेटर रुमकीत कौर भी मौजूद रहीं।

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